📅 दिनांक: 28 मई 2025
✍️ Jan Awaaz न्यूज़ डेस्क
भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) की पूर्व चेयरपर्सन माधबी पुरी बुच को लोकपाल ने सभी भ्रष्टाचार के आरोपों से मुक्त कर दिया है। यह वही आरोप थे जो वर्ष 2024 में चर्चित हिंडनबर्ग रिपोर्ट के आधार पर लगाए गए थे। अब लोकपाल ने इन शिकायतों को “राजनीतिक प्रेरित” और “बिना किसी ठोस सबूत” के बताया है।
🔍 क्या थे आरोप?
पिछले वर्ष अमेरिकी फर्म Hindenburg Research ने एक रिपोर्ट जारी की थी, जिसमें यह दावा किया गया था कि माधबी पुरी बुच और उनके पति का उन विदेशी फंड्स से संबंध था जो अडानी समूह के शेयरों में कथित हेराफेरी में शामिल थे।
इसके बाद टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा और अन्य ने लोकपाल में शिकायत दर्ज की थी।
⚖️ लोकपाल का फैसला
28 मई 2025 को लोकपाल की 6 सदस्यीय पीठ, जिसकी अध्यक्षता न्यायमूर्ति ए.एम. खानविलकर ने की, ने जांच के बाद स्पष्ट किया:
“ये शिकायतें अनुमानों और कल्पनाओं पर आधारित थीं। इनमें कोई भी सत्यापन योग्य या ठोस साक्ष्य मौजूद नहीं था। यह रिपोर्ट एक शॉर्ट-सेलर संस्था द्वारा तैयार की गई थी, जिसका उद्देश्य भारत की कंपनियों को लक्षित करना था।”
🧑💼 माधबी पुरी बुच का पक्ष
पूर्व चेयरपर्सन माधबी पुरी बुच और उनके पति ने सभी आरोपों को पहले ही “बेबुनियाद” बताया था। उन्होंने यह भी कहा कि उन्होंने अपने कार्यकाल में SEBI के सामने सभी आवश्यक वित्तीय खुलासे समय पर किए हैं।
📌 माधबी पुरी बुच का कार्यकाल
- माधबी पुरी बुच ने 2 मार्च 2022 को SEBI की पहली महिला चेयरपर्सन के रूप में पदभार संभाला था।
- उन्होंने 1 मार्च 2025 तक सेवा दी।
- इस दौरान उन्होंने तकनीक-आधारित रेगुलेशन, डेटा ट्रांसपेरेंसी और निवेशकों की सुरक्षा से जुड़े कई फैसले लिए।
📚 निष्कर्ष
लोकपाल के इस फैसले से साफ हो गया है कि माधबी पुरी बुच पर लगाए गए आरोप राजनीतिक और मनगढ़ंत थे। यह फैसला भारतीय न्याय व्यवस्था की निष्पक्षता और पारदर्शिता को दर्शाता है।